Juma ki namaj-जुमा की नमाज़
✦बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम✦
नमाजों की नियत तरीक़ा(अरैबिक और हिंदी मे)
नमाज-ऐ - जुमा
रकअतों की संख्या - १४
(४ सुन्नत(क़बलुल जुमा - जुमा से पहले), २ फर्ज, ४ सुन्नत(बादुल जुमा - जुमा के बाद), २ सुन्नत, २ नफ़ल )
४ रकत सुन्नत नमाज़ की नीयत का तरीका
हिंदी में नीयत की मैंने चार रकअत नमाज़ जुमा सुन्नत रसूले पाक की वास्ते अल्लाह त'आला के रुख मेरा का'अबा शरीफ की तरफ "अल्लाहु अकबर ".
अरेबिक में नवैतो अन ओसल्ली लिल्लाहि त'आला अर्बअ रकाती सलातिल जुमा सुन्नत रसूलल्लाह मुतवज्जैहन इला जेहतिल काबतिश्शरीफते "अल्लाहु अकबर ".
२ रकत फर्ज नमाज़ की नीयत का तरीका
हिंदी में नीयत की मैंने दो रकअत नमाज़ जुमा की फर्ज वास्ते अल्लाह त'आला के रुख मेरा का'अबा शरीफ की तरफ # "अल्लाहु अकबर ".
अरेबिक में नवैतो अन ओसल्ली लिल्लाहि त'आला अर्बअ रकाती सलातिल फर्दऊल्लाह त'आला @ मुतवज्जैहन इला जेहतिल काबतिश्शरीफते "अल्लाहु अकबर ".
नोट - अगर नमाज़ जमात के साथ पढ़ रहे है इस पढ़े (हिंदी "#पीछे इस इमाम के") (अरेबिक "@ इक़तदायितो बी हाजल इमाम")
४ रकत सुन्नत नमाज़ की नीयत का तरीका
हिंदी में नीयत की मैंने चार रकअत नमाज़ जुमा सुन्नत रसूले पाक की वास्ते अल्लाह त'आला के रुख मेरा का'अबा शरीफ की तरफ "अल्लाहु अकबर ".
अरेबिक में नवैतो अन ओसल्ली लिल्लाहि त'आला अर्बअ रकाती सलातिल जुमा सुन्नत रसूलल्लाह मुतवज्जैहन इला जेहतिल काबतिश्शरीफते "अल्लाहु अकबर ".
२ रकत सुन्नत नमाज़ की नीयत का तरीका
हिंदी में नीयत की मैंने दो रकअत नमाज़ जुमा सुन्नत रसूले पाक की वास्ते अल्लाह त'आला के रुख मेरा का'अबा शरीफ की तरफ "अल्लाहु अकबर ".
अरेबिक में नवैतो अन ओसल्ली लिल्लाहि त'आला रकाती सलातिल जुमा सुन्नत रसूलल्लाह मुतवज्जैहन इला जेहतिल काबतिश्शरीफते "अल्लाहु अकबर ".
२ रकत नफ़ल नमाज़ की नीयत का तरीका
हिंदी में नीयत की मैंने दो रकअत नमाज़ नफ़ल की वास्ते अल्लाह त'आला के रुख मेरा का'अबा शरीफ की तरफ "अल्लाहु अकबर ".
अरेबिक में नवैतो अन ओसल्ली लिल्लाहि त'आला रकाती सलातिल नफ़ल मुतवज्जैहन इला जेहतिल काबतिश्शरीफते "अल्लाहु अकबर ".
बातें और मसाइल (Zaroori Baatein aur Masail)
फ़र्ज़ की पाबंदी: जुमा की 2 रकात फ़र्ज़ इमाम के पीछे पढ़ना अनिवार्य (फ़र्ज़) है। अगर कोई शख़्स जमात से फ़र्ज़ नहीं पढ़ पाता, तो उसे अकेले जुमा नहीं बल्कि ज़ुहर की 4 रकात फ़र्ज़ पढ़नी होगी।
खुत्बा सुनना: जब इमाम खुत्बा (Speech) शुरू करे, तो बात करना, चलना-फिरना या नमाज़ पढ़ना मना है। खुत्बा पूरी तवज्जो के साथ सुनना वाजिब है।
सुन्नत और नफ़ल के नियम: सुन्नत और नफ़ल नमाज़ों की हर रकात में सूरह फ़ातिहा के बाद कोई दूसरी सूरह मिलाना ज़रूरी है।
तैयारी: जुमा के दिन ग़ुस्ल करना, साफ़ कपड़े पहनना और इत्र लगाना सुन्नत है।
समय: जुमा की नमाज़ का वक़्त वही होता है जो ज़ुहर की नमाज़ का होता है।
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