Isha
✦बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम✦
नमाजों की नियत तरीक़ा(अरैबिक और हिंदी मे)
नमाज-ऐ - ईशा
रकअतों नई संख्या - १७
(४ सुन्नत(ग़ैरमुअक्किदा), ४ फर्ज, २ सुन्नत(मुअक्किदा) २ नफ़िल/नफ़्ल, ३ वित्र(वाजिब), २ नफ़ल )
४ रकत सुन्नत नमाज़ की नीयत का तरीका
हिंदी में नीयत की मैंने चार रकअत नमाज़ इशा की सुन्नत रसूले पाक की, वास्ते अल्लाह त'आला के रुख मेरा का'अबा शरीफ की तरफ "अल्लाहु अकबर ".
अरेबिक में नवैतो अन ओसल्ली लिल्लाहि त'आला अर्बअ रकाती सलातिल इशा सुन्नत रसूलल्लाह मुतवज्जैहन इला जेहतिल काबतिश्शरीफते "अल्लाहु अकबर ".
४ रकत फर्ज नमाज़ की नीयत का तरीका
हिंदी में नीयत की मैंने चार रकअत नमाज़ इशा की फर्ज वास्ते अल्लाह त'आला के रुख मेरा का'अबा शरीफ की तरफ # "अल्लाहु अकबर ".
अरेबिक में नवैतो अन ओसल्ली लिल्लाहि त'आला अर्बअ रकाती सलातिल इशा फर्दऊल्लाह त'आला @ मुतवज्जैहन इला जेहतिल काबतिश्शरीफते "अल्लाहु अकबर ".
नोट - अगर नमाज़ जमात के साथ पढ़ रहे है इस पढ़े (हिंदी "#पीछे इस इमाम के") (अरेबिक "@ इक़तदायितो बी हाजल इमाम")
२ रकत सुन्नत नमाज़ की नीयत का तरीका
हिंदी में नीयत की मैंने दो रकअत नमाज़ इशा सुन्नत रसूले पाक की, वास्ते अल्लाह त'आला के रुख मेरा का'अबा शरीफ की तरफ "अल्लाहु अकबर ".
अरेबिक में नवैतो अन ओसल्ली लिल्लाहि त'आला रकाती सलातिल इशा, सुन्नत रसूलल्लाह मुतवज्जैहन इला जेहतिल काबतिश्शरीफते "अल्लाहु अकबर ".
२ रकत नफ़ल नमाज़ की नीयत का तरीका
हिंदी में नीयत की मैंने दो रकअत नमाज़ नफ़ल की, वास्ते अल्लाह त'आला के रुख मेरा का'अबा शरीफ की तरफ "अल्लाहु अकबर ".
अरेबिक में नवैतो अन ओसल्ली लिल्लाहि त'आला रकाती सलातिल नफ़ल, मुतवज्जैहन इला जेहतिल काबतिश्शरीफते "अल्लाहु अकबर ".
3 रकत वित्र(वाज़िब)नमाज़ की नीयत का तरीका
हिंदी में नीयत की मैंने तीन रकअत नमाज़ वित्र वाज़िब की, वास्ते अल्लाह त'आला के रुख मेरा का'अबा शरीफ की तरफ "अल्लाहु अकबर ".
अरेबिक में नवैतो अन ओसल्ली लिल्लाहि त'आला सलासा रकाति सलातिल वित्रि वाजिबुल्लाह तआला मुतवज्जैहन इला जेहतिल काबतिश्शरीफते "अल्लाहु अकबर "
नोट - अगर नमाज़ जमात के साथ पढ़ रहे है इस पढ़े (हिंदी "#पीछे इस इमाम के") (अरेबिक "@ इक़तदायितो बी हाजल इमाम")
२ रकत नफ़ल नमाज़ की नीयत का तरीका
- हिंदी में नीयत की मैंने दो रकअत नमाज़ नफ़ल की वास्ते अल्लाह त'आला के रुख मेरा का'अबा शरीफ की तरफ "अल्लाहु अकबर ".
- हिंदी में नीयत की मैंने दो रकअत नमाज़ नफ़ल की वास्ते अल्लाह त'आला के रुख मेरा का'अबा शरीफ की तरफ "अल्लाहु अकबर ".
अरेबिक में नवैतो अन ओसल्ली लिल्लाहि त'आला रकाती सलातिल नफ़ल मुतवज्जैहन इला जेहतिल काबतिश्शरीफते "अल्लाहु अकबर "
नमाज़ के कुछ ज़रूरी मसाइल और तरीक़ों
नमाज़ के कुछ ज़रूरी मसाइल और तरीक़ों
1. वित्र की नमाज़ का तरीक़ा (Vitr Ka Tariqa)
वित्र की नमाज़ ईशा के फ़र्ज़ और सुन्नत के बाद पढ़ी जाती है। यह 3 रकात होती है और इसे पढ़ने का ख़ास तरीक़ा यह है:
पहली दो रकात आम नमाज़ की तरह पढ़ें (सूरह फ़ातिहा के बाद कोई सूरह मिलाएं)।
तीसरी रकात में सूरह फ़ातिहा और कोई सूरह पढ़ने के बाद, रुकू में जाने से पहले 'अल्लाहु अकबर' कहते हुए हाथ कानों तक उठाएं और फिर वापस बांध लें।
इसके बाद "दुआ-ए-क़ुनूत" पढ़ें। अगर दुआ-ए-क़ुनूत याद न हो, तो "रब्बना आतिना फिद दुनिया..." भी पढ़ सकते हैं।
वित्र की नमाज़ ईशा के फ़र्ज़ और सुन्नत के बाद पढ़ी जाती है। यह 3 रकात होती है और इसे पढ़ने का ख़ास तरीक़ा यह है:
पहली दो रकात आम नमाज़ की तरह पढ़ें (सूरह फ़ातिहा के बाद कोई सूरह मिलाएं)।
तीसरी रकात में सूरह फ़ातिहा और कोई सूरह पढ़ने के बाद, रुकू में जाने से पहले 'अल्लाहु अकबर' कहते हुए हाथ कानों तक उठाएं और फिर वापस बांध लें।
इसके बाद "दुआ-ए-क़ुनूत" पढ़ें। अगर दुआ-ए-क़ुनूत याद न हो, तो "रब्बना आतिना फिद दुनिया..." भी पढ़ सकते हैं।
2. फ़र्ज़ नमाज़ के नियम (Farz Namaz Ke Masail)
4 रकात वाली फ़र्ज़ नमाज़ (जैसे ज़ुहर, अस्र और ईशा) में रकातों का अंतर समझना ज़रूरी है:
पहली 2 रकात: सूरह फ़ातिहा के बाद कोई दूसरी सूरह मिलाना ज़रूरी है।
आख़िरी 2 रकात: इसमें सिर्फ सूरह फ़ातिहा पढ़ी जाती है, कोई दूसरी सूरह नहीं मिलाई जाती।
4 रकात वाली फ़र्ज़ नमाज़ (जैसे ज़ुहर, अस्र और ईशा) में रकातों का अंतर समझना ज़रूरी है:
पहली 2 रकात: सूरह फ़ातिहा के बाद कोई दूसरी सूरह मिलाना ज़रूरी है।
आख़िरी 2 रकात: इसमें सिर्फ सूरह फ़ातिहा पढ़ी जाती है, कोई दूसरी सूरह नहीं मिलाई जाती।
3. सुन्नत और नफ़ल नमाज़ (Sunnat aur Nafl)
सुन्नत और नफ़ल नमाज़ पढ़ने का तरीक़ा फ़र्ज़ से थोड़ा अलग होता है:
इन नमाज़ों की हर रकात (चाहे 2 रकात हो या 4 रकात) में सूरह फ़ातिहा के बाद कोई दूसरी सूरह मिलाना ज़रूरी (वाजिब) है।
सुन्नत और नफ़ल नमाज़ पढ़ने का तरीक़ा फ़र्ज़ से थोड़ा अलग होता है:
इन नमाज़ों की हर रकात (चाहे 2 रकात हो या 4 रकात) में सूरह फ़ातिहा के बाद कोई दूसरी सूरह मिलाना ज़रूरी (वाजिब) है।
4. आख़िरी नफ़ल का मसला (Aakhri Nafl)
अक्सर लोग ईशा में वित्र के बाद 2 रकात नफ़ल पढ़ते हैं:
इन 2 रकात नफ़ल को बैठकर पढ़ना भी जायज़ है, लेकिन बैठकर पढ़ने पर सवाब आधा मिलता है।
खड़े होकर पढ़ना ज़्यादा अफ़ज़ल और बेहतर है ताकि पूरा सवाब मिले।
अक्सर लोग ईशा में वित्र के बाद 2 रकात नफ़ल पढ़ते हैं:
इन 2 रकात नफ़ल को बैठकर पढ़ना भी जायज़ है, लेकिन बैठकर पढ़ने पर सवाब आधा मिलता है।
खड़े होकर पढ़ना ज़्यादा अफ़ज़ल और बेहतर है ताकि पूरा सवाब मिले।
ख़ुलासा (Table for Quick Reference)
नमाज़ की क़िस्म सूरह मिलाना (Surah Recitation) विशेष निर्देश फ़र्ज़ (Farz) सिर्फ पहली 2 रकात में आख़िरी 2 रकात में सिर्फ सूरह फ़ातिहा। सुन्नत/नफ़ल हर रकात में ज़रूरी सुन्नत-ए-मुअक्कदा को छोड़ना नहीं चाहिए। वित्र (Vitr) हर रकात में ज़रूरी तीसरी रकात में दुआ-ए-क़ुनूत अनिवार्य है।
| नमाज़ की क़िस्म | सूरह मिलाना (Surah Recitation) | विशेष निर्देश |
| फ़र्ज़ (Farz) | सिर्फ पहली 2 रकात में | आख़िरी 2 रकात में सिर्फ सूरह फ़ातिहा। |
| सुन्नत/नफ़ल | हर रकात में ज़रूरी | सुन्नत-ए-मुअक्कदा को छोड़ना नहीं चाहिए। |
| वित्र (Vitr) | हर रकात में ज़रूरी | तीसरी रकात में दुआ-ए-क़ुनूत अनिवार्य है। |
TARIKH / HAWALA
Waqt
Tarika
Dua
Salam
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