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कुरान और सुन्नत की रोशनी में एक आधुनिक गाइड

नात शरीफ पढ़ने के शौकीन के लिए बनाया गया है|

मुस्तफ़ा जान-ए-रहमत पे लाखों सलाम, शम्अ-ए-बज़्म-ए-हिदायत पे लाखों सलाम || सलाम || हिंदी में ||


मुस्तफ़ा जान-ए-रहमत पे लाखों सलाम, शम्अ-ए-बज़्म-ए-हिदायत पे लाखों सलाम।

मेहर-ए-चर्ख़-ए-नुबुव्वत पे रौशन दरूद, गुल-ए-बाग़-ए-रिसालत पे लाखों सलाम।

शहरयार-ए-इरम ताजदार-ए-हरम, नौबहार-ए-शफ़ाअत पे लाखों सलाम।

शब-ए-असरा के दूल्हा पे दाइम दरूद, नौशा-ए-बज़्म-ए-जन्नत पे लाखों सलाम।

अर्श की ज़ेब-ओ-ज़ीनत पे अर्शी दरूद, फ़र्श की तीब-ओ-नुज़हत पे लाखों सलाम।

नूर-ए-ऐन-ए-लत़ाफ़त पे अलत़फ़ दरूद, जैब-ओ-जैन-ए-नज़ाफ़त पे लाखों सलाम।

सर्व-ए-नाज़-ए-क़िदम मग़्ज़-ए-राज़-ए-हिकम, यक्का-ताज़-ए-फ़ज़ीलत पे लाखों सलाम।

नुक्ता-ए-सिर्र-ए-वहदत पे यकता दरूद, मरकज़-ए-दौर-ए-कसरत पे लाखों सलाम।

साहिब-ए-रज्अत-ए-शम्स-ओ-शक्कुल क़मर, नाइब-ए-दस्त-ए-क़ुदरत पे लाखों सलाम।

जिसके ज़ेर-ए-लिवा आदम-ओ-मन सिवा, उस सज़ा-ए-सिय़ादत पे लाखों सलाम।

अर्श या फ़र्श है जिसके ज़ेर-ए-नगीं, उसकी क़ाहिर रियसत पे लाखों सलाम।

अस्ल-ए-हर बूद-ओ-बहबूद तख़्म-ए-वजूद, क़ासिम-ए-कन्ज़-ए-नेअमत पे लाखों सलाम।

फ़त्ह-ए-बाब-ए-नुबुव्वत पे बेहद दरूद, ख़त्म-ए-दौर-ए-रिसालत पे लाखों सलाम।

शर्क़-ए-अन्वार-ए-क़ुदरत पे नूरी दरूद, फ़त्ह-ए-अज़हार-ए-क़ुर्बत पे लाखों सलाम।

बे-सहीम-ओ-क़सीम-ओ-अदील-ओ-मसील, जौहर-ए-फ़र्द-ए-इज़्ज़त पे लाखों सलाम।

सिर्र-ए-ग़ैब-ए-हिदायत पे ग़ैबी दरूद, इत्र-ए-जैव-ए-निहायत पे लाखों सलाम।

माह-ए-लाहूत-ए-ख़िलवत पे लाखों दरूद, शाह-ए-नासूत-ए-जल्वत पे लाखों सलाम।

कन्ज़-ए-हर बेकस-ओ-बे-नवा पर दरूद, हिर्ज़-ए-हर रफ़्ता ताक़त पे लाखों सलाम।

पर्तव-ए-इस्म-ए-ज़ात-ए-अहद पर दरूद, नुस्ख़ा-ए-जामइय्यत पे लाखों सलाम।

मत्ल-ए-हर सआदत पे असअद दरूद, मक़्त-ए-हर सिय़ादत पे लाखों सलाम।

ख़ल्क़ के दादरस सबके फ़रयाद रस, कहफ़-ए-रोज़-ए-मुसीबत पे लाखों सलाम।

मुझसे बेकस की दौलत पे लाखों दरूद, मुझसे बेबस की क़ुव्वत पे लाखों सलाम।

शम्अ-ए-बज़्म-ए-दना हूँ मैं गुम्कुन अना, शर्ह-ए-मत्न-ए-हुविय्यत पे लाखों सलाम।

इन्तिहा-ए-दुआ-ए-इब्तिदा-ए-यक़ीं, जम्अ-ए-तफ़रीक़-ओ-कसरत पे लाखों सलाम।

कसरत-ए-बा'द-ए-क़िल्लत पे अक्सर दरूद, इज़्ज़त-ए-बा'द-ए-ज़िल्लत पे लाखों सलाम।

रब-ए-आला की नेअमत पे आला दरूद, हक़ तआला की मिन्नत पे लाखों सलाम।

हम ग़रीबों के आक़ा पे बेहद दरूद, हम फ़क़ीरों की सरवत पे लाखों सलाम।

फ़र्हत-ए-जान-ए-मोमिन पे बेहद दरूद, ग़ैज़-ए-क़ल्ब-ए-जलालत पे लाखों सलाम।

सबब-ए-हर सबब मुन्तहा-ए-तलब, इल्लत-ए-जुम्ला इल्लत पे लाखों सलाम।

मस्दर-ए-मुज़हरिय्यत पे अज़हर दरूद, मज़हर-ए-मस्दरिय्यत पे लाखों सलाम।

जिसके जल्वे से मुरझाई कलियाँ खिलीं, उस गुल-ए-पाक मिम्बत पे लाखों सलाम।

क़द-ए-बे-साया के साया-ए-मर्हमत, ज़िल्ल-ए-ममदूद-ए-राफ़त पे लाखों सलाम।

ताइरान-ए-क़ुद्स जिसकी हैं क़ुमरियां, उस सही सर्व-क़ामत पे लाखों सलाम।

वस्फ़ जिसका है आइना-ए-हक़ नुमा, उस ख़ुदा साज़ तलअत पे लाखों सलाम।

जिसके आगे सर-ए-सरवरां ख़म रहे, उस सर-ए-ताज-ए-रिफ़अत पे लाखों सलाम।

वो करम की घटा गेसू-ए-मुश्क सा, लक्का-ए-अब्र-ए-राफ़त पे लाखों सलाम।

लैलतुल क़द्र में मत्ल-उल फ़ज्र-ए-हक़, माँग की इस्तिक़ामत पे लाखों सलाम।

लख़्त लख़्त-ए-दिल-ए-हर जिगर चाक से, शाना करने की हालत पे लाखों सलाम।

दूर-ओ-नज़दीक के सुनने वाले वो कान, कान-ए-लअ'ल-ए-करामत पे लाखों सलाम।

चश्मा-ए-मेहर में मौज-ए-नूर-ए-जलाल, उस रग-ए-हाशमिय्यत पे लाखों सलाम।

जिसके माथे शफ़ाअत का सेहरा रहा, उस जबीन-ए-सआदत पे लाखों सलाम।

जिनके सज्दे को मेहराब-ए-काबा झुकी, उन भवों की लत़ाफ़त पे लाखों सलाम।

उनकी आँखों पे वो साया अफ़ग़न मिज़ा, ज़िल्ल-ए-क़स्र-ए-रहमत पे लाखों सलाम।

अश्क बारी-ए-मिज़्गां पे बरसे दरूद, सिल्क-ए-दुर्र-ए-शफ़ाअत पे लाखों सलाम।

मा'ना-ए-क़द रआ मक़्सद-ए-मा तग़ा, नर्गिस-ए-बाग़-ए-क़ुदरत पे लाखों सलाम।

जिस तरफ़ उठ गयी दम में दम आ गया, उस निगाह-ए-इनायत पे लाखों सलाम।

नीची आँखों की शर्म-ओ-हया पर दरूद, ऊँची बीनी की रिफ़अत पे लाखों सलाम।

जिनके आगे चराग़-ए-क़मर झिलमिलाए, उन अज़ारों की तलअत पे लाखों सलाम।

उनके ख़द्द की सुहूलत पे बेहद दरूद, उनके क़द की रशाक़त पे लाखों सलाम।

जिस से तारीख़ दिल जगमगाने लगे, उस चमक वाली रंगत पे लाखों सलाम।

चाँद से मुँह पे ताबाँ दरख़्शाँ दरूद, नमक आगीं सबाहत पे लाखों सलाम।

शबनम-ए-बाग़-ए-हक़ यानी रुख़ का अरक़, उसकी सच्ची बराकत पे लाखों सलाम।

ख़त की गिर्द-ए-दहन वो दिलारा फ़बन, सब्ज़ा-ए-नहर-ए-रहमत पे लाखों सलाम।

रीश-ए-ख़ुश मुअतदिल मरहम-ए-रीश-ए-दिल, हाला-ए-माह-ए-नुदरत पे लाखों सलाम।

पतली पतली गुल-ए-क़ुद्स की पत्तियां, उन लबों की नज़ाकत पे लाखों सलाम।

वो दहन जिसकी हर बात वही-ए-ख़ुदा, चश्मा-ए-इल्म-ओ-हिकमत पे लाखों सलाम।

जिसके पानी से शादाब जान-ओ-जिनाँ, उस दहन की तरावत पे लाखों सलाम।

जिस से खारी कुएँ शीर-ओ-शकर बने, उस ज़ुलाल-ए-हलावत पे लाखों सलाम।

वो ज़बाँ जिसको सब 'कुन' की कुंजी कहें, उसकी नाफ़िज़ हुकूमत पे लाखों सलाम।

उसकी प्यारी फ़साहत पे बेहद दरूद, सय्यद-ए-दिलकश बलाग़त पे लाखों सलाम।

उसकी बातों की लज्ज़त पे लाखों दरूद, उसके ख़ुत्बे की हैबत पे लाखों सलाम।

वह दुआ जिसका जोबन बहार-ए-क़बूल, उस नसीम-ए-इजाबत पे लाखों सलाम।

जिनके गुच्छे से लच्छे झड़े नूर के, उन सितारों की नुज़हत पे लाखों सलाम।

जिसकी तस्कीं से रोते हुए हँस पड़े, उस तबस्सुम की आदत पे लाखों सलाम।

जिस में नहरें हैं शीर-ओ-शकर की रवाँ, उस गले की नज़़ारत पे लाखों सलाम।

दोश बर दोश है जिन के शाने शराफ़, ऐसे शानों की शौक़त पे लाखों सलाम।

हज्र-ए-अस्वद-ए-काबा-ए-जान-ओ-दिल, यानी मेहर-ए-नुबुव्वत पे लाखों सलाम।

रू-ए-आइना-ए-इल्म-ए-पुश्त-ए-हुज़ूर, पुश्ती-ए-क़स्र-ए-मिल्लत पे लाखों सलाम।

हाथ जिस सम्त उठा ग़नी कर दिया, मौज-ए-बहर-ए-समाअत पे लाखों सलाम।

जिसको बार-ए-दो आलम की परवाह नहीं, ऐसे बाज़ू की क़ुव्वत पे लाखों सलाम।

काबा-ए-दीन-ओ-ईमां के दोनों सुतूं, सय्यदैन-ए-रिसालत पे लाखों सलाम।

जिसके हर ख़त में है मौज-ए-नूर-ए-करम, उस कफ़-ए-बहर-ए-हिम्मत पे लाखों सलाम।

नूर के चश्मे लहराए दरिया बहे, उँगलियों की करामत पे लाखों सलाम।

ईद-ए-मुश्किल कुशाई के चमके हिलाल, नाख़ूनों की बशारत पे लाखों सलाम।

रफ़्अ-ए-ज़िक्र-ए-जलालत पे अरफ़ा दरूद, शर्ह-ए-सद्र-ए-सदारात पे लाखों सलाम।

दिल समझ से वरा है मगर यूँ कहूँ, ग़ुंचा-ए-राज़-ए-वहदत पे लाखों सलाम।

कुल जहाँ मिल्क और जौ की रोटी ग़िज़ा, उस शिकम की क़नाअत पे लाखों सलाम।

जो कि अज़्म-ए-शफ़ाअत पे खिंच कर बंधी, उस क़मर की हिमायत पे लाखों सलाम।

अम्बिया तह करें ज़ानू उनके हुज़ूर, ज़ानुओं की वजाहत पे लाखों सलाम।

साक़-ए-अस्ल-ए-क़िदम शाख़-ए-नख़्ल-ए-करम, शम्अ-ए-राह-ए-इसाबत पे लाखों सलाम।

खाई क़ुरआन ने ख़ाक-ए-गुज़र की क़सम, उस कफ़-ए-पा की हुर्मत पे लाखों सलाम।

जिस सुहानी घड़ी चमका तैबा का चाँद, उस दिल अफ़रोज़ साअत पे लाखों सलाम।

पहले सज्दे पे रोज़-ए-अज़ल से दरूद, यादगारी-ए-उम्मत पे लाखों सलाम।

ज़र-ए-शादाब-ए-हर ज़र-ए-पुर शीर से, बरकात-ए-रज़ाअत पे लाखों सलाम।

भाइयों के लिए तर्क-ए-पिस्ताँ करें, दूध पीतों की निस्फ़त पे लाखों सलाम।

महद-ए-वाला की क़िस्मत पे बेहद दरूद, बुर्ज-ए-माह-ए-रिसालत पे लाखों सलाम।

अल्लाह अल्लाह वो बचपन की फबन, उस ख़ुदा भाती सूरत पे लाखों सलाम।

उठते बूटों की नश्व-ओ-नुमा पर दरूद, खिलते ग़ुंचों की निखत पे लाखों सलाम।

फ़ज़्ल-ए-पैदाइशी पर हमेशा दरूद, खेलने से कराहत पे लाखों सलाम।

ए'तला-ए-जिल्लत पे आला दरूद, ए'तेदाल-ए-तबीयत पे लाखों सलाम।

बे-बनावट अदा पर हज़ारों दरूद, बे-तकल्लुफ़ मलाहत पे लाखों सलाम।

भीनी भीनी महक पर महकती दरूद, प्यारी प्यारी नफ़ासत पे लाखों सलाम।

मीठी मीठी इबारत पे शीरीं दरूद, अच्छी अच्छी इशारत पे लाखों सलाम।

सीधी सीधी रविश पर करोड़ों दरूद, सादी सादी तबीअत पे लाखों सलाम।

रोज़-ए-गर्म-ओ-शब-ए-तीरा-ओ-तार में, कोह-ओ-सहरा की ख़ल्वत पे लाखों सलाम।

जिसके घेरे में हैं अम्बिया-ओ-मलक, उस जहाँगीर-ए-बेअसत पे लाखों सलाम।

अंधे शीशे झलाझल दमकने लगे, जल्वा रेज़ी-ए-दावत पे लाखों सलाम।

लुत्फ़-ए-बेदारी-ए-शब पे बेहद दरूद, आलम-ए-ख़्वाब-ए-राहत पे लाखों सलाम।

ख़न्दा-ए-सुब्ह-ए-इशरत पे नूरी दरूद, गिर्या-ए-अब्र-ए-रहमत पे लाखों सलाम।

नर्मी-ए-ख़ू-ए-लीनत पे दाइम दरूद, गर्मी-ए-शान-ए-सतवत पे लाखों सलाम।

जिसके आगे खिंची गर्दनें झुक गयीं, उस ख़ुदा दाद शौकत पे लाखों सलाम।

किसको देखा ये मूसा से पूछे कोई, आँख वालों की हिम्मत पे लाखों सलाम।

गिर्द-ए-माह दस्त-ए-अंजुम में रख़्शाँ हिलाल, बद्र की दफ़्अ-ए-ज़ुल्मत पे लाखों सलाम।

शोर-ए-तक्बीर से थरथराती ज़मीं, जुम्बिश-ए-जौश-ए-नुसरत पे लाखों सलाम।

नअरा-हा-ए-दिलेरां से बन गूँजते, गुर्रिश-ए-कोस-ए-जुरअत पे लाखों सलाम।

वह चकाचाक ख़ंजर से आती सदा, मुस्तफ़ा तेरी सौलत पे लाखों सलाम।

उनके आगे वो हम्ज़ा की जाँ-बाज़ियाँ, शेर-ए-ग़ुर्रान-ए-सतवत पे लाखों सलाम।

अल-ग़रज़ उनके हर मू पे लाखों दरूद, उनकी हर ख़ू व ख़स्लत पे लाखों सलाम।

उनके हर नाम-ओ-निस्बत पे नामी दरूद, उनके हर वक़्त-ओ-हालात पे लाखों सलाम।

उनके मौला की उन पर करोड़ों दरूद, उनके अस्हाब-ओ-इत्रत पे लाखों सलाम।

पारा-हा-ए-सुहुफ़ ग़ुंचा-ए-क़ुदुस, अहले बैत-ए-नुबुव्वत पे लाखों सलाम।

आब-ए-ततहीर से जिस में पौधे जमे, उस रियाज़-ए-नजाबत पे लाखों सलाम।

ख़ून-ए-ख़ैरुर रुसुल से है जिनका ख़मीर, उनकी बे-लौस तीनत पे लाखों सलाम।

उस बतूल-ए-जिगर पारा-ए-मुस्तफ़ा, हज्ला आरा-ए-इफ़्फ़त पे लाखों सलाम।

जिसका आँचल न देखा मह-ओ-मेहर ने, उस रिदा-ए-नज़ाहत पे लाखों सलाम।

सय्यदा जाहिरा तैयबा ताहिरा, जान-ए-अहमद की राहत पे लाखों सलाम।

हसन-ए-मुझ्तबा सय्यदुल अ शख़िया, राकिब-ए-दोश-ए-इज़्ज़त पे लाखों सलाम।

औज-ए-मेहर-ए-हुदा मौज-ए-बहर-ए-निदा, रूह-ए-रूह-ए-सख़ावत पे लाखों सलाम।

शहद ख़्वारे लुआब-ए-ज़बान-ए-नबी, चाशनी गीर-ए-इस्मत पे लाखों सलाम।

उस शहीद-ए-बला शाह-ए-गुलगूँ क़बा, बेकस-ए-दश्त-ए-ग़ुर्बत पे लाखों सलाम।

दुर्र-ए-दुरज-ए-नजफ़ मेहर-ए-बुर्ज-ए-शराफ़, रंग-ए-रू-ए-शहादत पे लाखों सलाम।

अहले इस्लाम की मादरान-ए-शफ़ीक़, बानूवान-ए-तहारत पे लाखों सलाम।

जल्वा गय्यान-ए-बैतुश शराफ़ पर दरूद, पर्दा गय्यान-ए-इफ़्फ़त पे लाखों सलाम।

सिय्यमा पहली माँ कहफ़-ए-अम्न-ओ-अमाँ, हक़ गुज़ारे रफ़ाक़त पे लाखों सलाम।

अर्श से जिसपे तस्लीम नाज़िल हुई, उस सरा-ए-सलामत पे लाखों सलाम।

मन्ज़िलुम मिन कसब ला नसब ला सख़ब, ऐसे कोषक की ज़ीनत पे लाखों सलाम।

बिन्त-ए-सिद्दीक़ आराम-ए-जान-ए-नबी, उस हरीम-ए-बाराअत पे लाखों सलाम।

यानी है सूरह-ए-नूर जिनकी गवाह, उनकी पुर-नूर सूरत पे लाखों सलाम।

जिनमें रूहुल क़ुदुस बे-इजाज़त न जाए, उन सुरादिक की इस्मत पे लाखों सलाम।

शम्अ-ए-ताबाने काशाना-ए-इज्तिहाद, मुफ़्ती-ए-चार मिल्लत पे लाखों सलाम।

जाँ-निसारान-ए-बद्र-ओ-उहुद पर दरूद, हक़ गुज़ारान-ए-बैअत पे लाखों सलाम।

वह दसो जिनको जन्नत का मुज़दा मिला, उस मुबारक जमाअत पे लाखों सलाम।

ख़ास उस साबिक़-ए-सैर-ए-क़ुर्ब-ए-ख़ुदा, औहद-ए-कामिलिय्यत पे लाखों सलाम।

सई-ए-मुस्तफ़ा मई-ए-इस्तफ़ा, इज़्ज़-ओ-नाज़-ए-ख़िलाफ़त पे लाखों सलाम।

अस्दक़ुस सादिक़ी सय्यदुल मुत्तक़ी, चश्म-ओ-गोश-ए-विज़ारत पे लाखों सलाम।

वह उमर जिस के आदा पे शैदा सक़र, उस ख़ुदा दोस्त हज़रत पे लाखों सलाम।

फ़ारूक़-ए-हक़-ओ-बातिल इमामुल हुदा, तेग़-ए-मसलूल-ए-शिद्दत पे लाखों सलाम।

तर्जुमान-ए-नबी हम-ज़बान-ए-नबी, जान-ए-शान-ए-अदालत पे लाखों सलाम।

ज़ाहिद-ए-मस्जिद-ए-अहमदी पर दरूद, दौलत-ए-जैष-ए-उस्रत पे लाखों सलाम।

दुर्र-ए-मन्सूर क़ुरआन की सिल्क-ए-बही, ज़ौज-ए-दो नूर-ए-इफ़्फ़त पे लाखों सलाम।

यानी उस्मान साहब क़मीस-ए-हुदा, हुल्ला पुष-ए-शहादत पे लाखों सलाम।

मुर्तज़ा शेर-ए-हक़ अशजउल अशजई, साक़ी-ए-शीर-ओ-शर्बत पे लाखों सलाम।

अस्ल-ए-नस्ल-ए-सफ़ा वजह-ए-वस्ल-ए-ख़ुदा, बाब-ए-फ़स्ल-ए-विलायत पे लाखों सलाम।

अव्वलीं दफ़ा-ए-अहले रिफ़्ज़-ओ-ख़ुरूज, चारमी रुक्न-ए-मिल्लत पे लाखों सलाम।

शेर-ए-शमशीर ज़न शाह-ए-ख़ैबर शिकन, पर्त्व-ए-दस्त-ए-क़ुदरत पे लाखों सलाम।

माही-ए-रिफ़्ज़-ओ-तफ़्ज़ील-ओ-नस्ब-ओ-ख़ुरूज, हामी-ए-दीन-ओ-सुन्नत पे लाखों सलाम।

मोमिनीन पेश-ए-फ़त्ह-ओ-पस-ए-फ़त्ह सब, अहले ख़ैर-ओ-अदालत पे लाखों सलाम।

जिस मुसल्मान ने देखा उन्हें इक नज़र, उस नज़र की बसारत पे लाखों सलाम।

जिनके दुश्मन पे लानत है अल्लाह की, उन सब अहले मुहब्बत पे लाखों सलाम।

बाक़ी-ए-साक़ियान-ए-शराब-ए-तहूर, ज़ैन-ए-अहले इबादत पे लाखों सलाम।

और जितने हैं शहज़ादे उस शाह के, उन सब अहले मकानात पे लाखों सलाम।

उनकी बाला शराफ़त पे आला दरूद, उनकी वाला सिय़ादत पे लाखों सलाम।

शाफ़ई मालकी अहमद इमाम-ए-हनीफ़, चार बाग़-ए-इमामत पे लाखों सलाम।

कामिलान-ए-तरीक़त पे कामिल दरूद, हामिलान-ए-शरीअत पे लाखों सलाम।

ग़ौस-ए-आज़म इमाम-उल-मुत्तक़ा वन्नुक़ा, जल्वा-ए-श्यान-ए-क़ुदरत पे लाखों सलाम।

क़ुत्ब-ए-अब्दाल-ओ-इरशाद-ओ-रुश्द-उर-शाद, मुह्यी-ए-दीन-ओ-मिल्लत पे लाखों सलाम।

मर्दे ख़ैल-ए-तरीक़त पे बेहद दरूद, फ़र्द-ए-अहले हक़ीक़त पे लाखों सलाम।

जिसकी मिम्बर बनी गर्दन-ए-औलिया, उस क़दम की करामत पे लाखों सलाम।

शाह-ए-बरकात-ओ-बरकात-ए-पेशीनियां, नौ बहार-ए-तरीक़त पे लाखों सलाम।

सय्यद आल-ए-मुहम्मद इमामुर रशीद, गुल-ए-रौज़-ए-रियाज़त पे लाखों सलाम।

हज़रत-ए-हम्ज़ा शेर-ए-ख़ुदा व रसूल, ज़ीनत-ए-क़ादरिय्यत पे लाखों सलाम।

नाम-ओ-काम-ओ-तन-ओ-जान-ओ-हाल-ओ-मक़ाल, सबमें अच्छे की सूरत पे लाखों सलाम।

नूर-ए-जाँ इत्र-ए-मज्मूआ आल-ए-रसूल, मेरे आक़ा-ए-नेअमत पे लाखों सलाम।

ज़ैब-ए-सज्जादा सज्जाद-ए-नूरी निहाद, अहमद-ए-नूर तीनत पे लाखों सलाम।

बे-अज़ाब-ओ-इताब-ओ-हिसाब-ओ-किताब, ता-अबद अहले सुन्नत पे लाखों सलाम।

तेरे उन दोस्तों के तुफ़ैल ए ख़ुदा, बन्दा-ए-नंग-ए-ख़िल्क़त पे लाखों सलाम।

मेरे उस्ताद माँ-बाप भाई बहन, अहले वुल्द-ओ-अशीर्रत पे लाखों सलाम।

एक मेरा ही रहमत में दावा नहीं, शाह की सारी उम्मत पे लाखों सलाम।

काश महशर में जब उनकी आमद हो और, भेजें सब उनकी शौक़त पे लाखों सलाम।

मुझसे ख़िदमत के क़ुदसी कहें हाँ रज़ा, मुस्तफ़ा जान-ए-रहमत पे लाखों सलाम। 

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