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कुरान और सुन्नत की रोशनी में एक आधुनिक गाइड

नात शरीफ पढ़ने के शौकीन के लिए बनाया गया है|

कदम जब चूम ले मंज़िल तो जज़्बा मुस्कुराता हैदुआ लेकर चलो माँ की तो रस्ता मुस्कुराता है || गीत || Naat Sharif || lyrics

 कदम जब चूम ले मंज़िल तो जज़्बा मुस्कुराता है
दुआ लेकर चलो माँ की तो रस्ता मुस्कुराता है।



किया नाराज़ माँ को और बच्चा हँस के ये बोला
के ये माँ है मियाँ इसका तो गुस्सा मुस्कुराता है।

किताबों से निकलकर तितलियाँ ग़ज़लेँ सुनाती हैँ
टिफिन रखती है मेरी माँ तो बस्ता मुस्कुराता है।

सभी रिश्ते यहाँ बर्बाद हैँ मतलब परस्ती से
मगर सदियों से माँ-बेटे का रिश्ता मुस्कुराता है।

सुबह उठते ही जब मैँ चूमता हूँ माँ की आँखों को
ख़ुदा के साथ उसका हर फरिश्ता मुस्कुराता है।

मेरी माँ के बिना मेरी सभी ग़ज़लेँ अधूरी हैँ
अगर माँ लफ़्ज़ शामिल हो तो किस्सा मुस्कुराता है।

वो उजला हो के मैला हो या मँहगा हो के सस्ता हो
ये माँ का सर है इस पे हर दुपट्टा मुस्कुराता है।

फरिश्तों ने कहा आमाल का संदूक क्या खोलेँ
दुआ लाया है माँ की, इसका बक्सा मुस्कुराता है।

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