या नबी नज़रे करम फ़रमाना, ऐ हसनैन के नाना
या नबी नज़रे करम फ़रमाना, ऐ हसनैन के नाना।
ज़हरा पाक के सदक़े हमको, तैबा में बुलाना। ऐ हसनैन के नाना।
आप के दर का मैं हूँ भिकारी, आप हैं मेरे दाता।
सारे रिश्ते नातों से है, प्यारा अपना नाता।
आप को तो आता है जिनको, सबकी लाज निभाना। ऐ हसनैन के नाना।
बे-साया हैं लेकिन वो, जग पर है आपका साया।
अर्श-ए-मुअल्ला बना मोहल्ला, दीद को रब ने बुलाया।
हश्र तक न होगा किसी का, ऐसा आना जाना। ऐ हसनैन के नाना।
सज गयी है मीलाद की महफ़िल, क्या है ख़ूब नज़ारा।
कैफ़-ओ-मस्ती में डूबा है, देखो आलम सारा।
ढूँढ रही आपकी रहमत, बख़्शिश का बहाना। ऐ हसनैन के नाना।
निस्बत का फ़ैज़ान है देखो, ख़ादिम-ए-ग़ौस-ए-जली हूँ।
करता है मुझ पे नाज़ ज़माना, मैं औसाफ़-ए-अली हूँ।
आप की आल के दर का सग हूँ, और साइल हूँ पुराना।
या नबी नज़रे करम फ़रमाना, ऐ हसनैन के नाना।
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